रविवार, 21 अप्रैल 2019

ज़ुल्म के ख़िलाफ़ एक आवाज़ है फैज़ुल हसन- वासिफ नेहाल अंसारी

AMUSU के पूर्व अध्यक्ष Faizul Hasan भाई को कौन नही जानता ? मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी के रिसर्च डिविज़न मे दिन रात गुज़ारने वाले फ़ैज़ुल हसन ने 2016 के स्टूडेंट्स के यूनियन के एलेक्शन से अपनी राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की और एएमयू छात्रों ने उन्हें 2662 वोटों से कामयाब किया। जब तक ये ए॰एम॰यू॰ एस॰यू॰ के अध्यक्ष रहे काफ़ी सक्रिय रहे ए॰एम॰यू॰ मे हर नाइंसाफ़ी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते रहे।अध्यक्ष रहते हुए और उसके बाद भी हिंदुस्तान मे हर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठायी चाहे वो अख़लाक़ का मामला हो या हाफ़िज़ जूनेद का पहलू खाँ के ज़ुल्म की दास्तान हो या रोहित वेमुला के मौत की बात हर वक़्त फ़ैज़ुल हसन भाई को सबसे आगे पाया
मुझे याद है कि साल 2016 में नजीब के लिए पुरे हिंदुस्तान से आवाज़ उठायी गयी और ए॰एम॰यू॰ से इस आवाज़ को फ़ैज़ुल हसन भाई ने सब से पहले उठाया और दिसम्बर मे नजीब के मामले को ले कर हुकूमत पर दबाव बनाने के लिए उन्होंने एएमयू से रेल रोको आंदोलन किया और पुलिस की लाठियाँ तक खायीं ए॰एम॰यू॰ के छात्रों पे लाठियाँ चलवाने की वजह से उस वक़्त के डी॰एम॰ राजमणि यादव को सस्पेंड किया गया।आप को याद होगा केरल बाढ़ के बारे मे जब वहाँ पे हज़ारों लोग बेघर होगये थे और भूकों मर रहे थे उस वक्त वहाँ अपनी टीम के साथ जा के नाव मे बैठ कर हफ़्तों तक बाढ़ग्रस्त लोगों को राहत सामग्री और खाने पीने का सामान पहुँचाते रहे।
दिल्ली मे जब रोहिंग्या कैम्प मे भीषड़ आग लगने से उनके पुरे घर जल कर राख और तबाह हो गये थे तब फ़ैज़ुल हसन भाई ने वहाँ जा के कई दिनो तक अपने हाथो से खाना बना के खिलाया और दिल्ली से लेकर मेवात तक लगभग 350 किमी० की बाईक रैली की। उसी नजीब के मामले को लेकर लखनऊ,पटना,बहराइच समेत देश के लगभग 20 जिलों मे प्रोटेस्ट किया और दिल्ली पहुँच कर CBI हेड क्वार्टर जाम किया । सीरिया में इज़राइल के द्वारा ढाए जा रहे ज़ुल्म ओ सितम और बमबारी मे बेक़सूरों को मौत के घाट उतार दिया गया AMU से इसके लिए आवाज़ बुलंद किया और हुकूमत पर दबाव बनाने के लिए इज़राइल एंबेसी और सीरिया एंबेसी का घेराव किया और ज़बरदस्त प्रोटेस्ट किया ।
फ़ैज़ुल हसन भाई ने  पुरे ए॰एम॰यू॰ से लगभग 10 लाख रुपए चंदा इकट्ठा कर के सीरियाई मुसलमानों की मदद की और उस राशि को अपनी ज़िम्मेदारी से सीरिया पहुँचाया।फ़िलिस्तीन मे हो रही ज़ुल्म व बरबरियत के खिलाफ हमेशा आवाज़ बुलंद किया और जब वहाँ पे हज़ारों लोगों को शहीद कर दिया गया तब इधर ए॰एम॰यू॰ मे उनके लिए दुआ और क़ुरान ख्वानी का एहतेमाम किया।उस वक़्त के यू॰पी॰ के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मुसलमानों को 18% रेजर्वेशन देने का वादा किया था जिसको पुरा नही किया फ़ैज़ुल हसन भाई ने उन्हें उनका वादा याद दिलाया और मुसलमानों के साथ किए गये विश्वाशघात को उजागर किया और AMU मे आने से रोक दिया और ख़ूब जम के उनके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया ।
2 साल पहले जब कासगंज मे दंगे हुए और मुसलमानों को घरों से निकाल के मारा जा रहा था उसके लिए सोशल मीडिया से लेकर एलेक्ट्रानिक मीडिया हर जगह आवाज़ उठाई और वहाँ के घायलों को अपनी जेब ख़र्च से लगभग 20 लोगों का AMU मेडिकल क़ालेज़ मे इलाज करवाया।बटला हाउस इनकाउंटर के ख़िलाफ़ हमेशा  आवाज़ उठाते रहे और उसके लिए कई बार जंतर मंतर पर धरना दिया और हुकूमत को ललकारते रहे । अलीगढ़ शहर मे जब बेक़सूर वसीम और आशू की दिनदहाड़े हत्या कर दी गयी और पुलिस द्वारा उनके घर वालों पर दबाव बनाने की कोशिश की गयी तब वहाँ फ़ैज़ुल हसन भाई ने जा कर उनके मुआविजे और मिट्टी होने से पहले कसूरवारों की गिरफ़्तारी की माँग की आख़िर में मजबूर होकर पुलिस ने फ़ौरन मुजरिमों को गिरफ़्तार किया ।
अलीगढ़ अतरौली कांड में फ़र्ज़ी इनकाउंटर मे मारे गये नौशद और मुस्तकीम के घर वालों को हक़ दिलाने के लिए सब से आगे आगे रहे और जब भगवा आतंकियों द्वारा किसी को उस गाँव मे जाने से जान मारने की धमकी मिलने लगी जिसका शिकार पंखुड़ी पाठक भी हुई थीं उस वक़्त अपनी मौत को दाँव पे लगा कर उस मामले को नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया के सामने लाया जिसमें उन पर फ़र्ज़ी मुक़दमे भी किए गये जिसका नतीजा ये हुआ कि उस वक़्त के एसएसपी को अलीगढ़ से हटना पड़ा ।और आज भी अपनी पीएचडी की सकालरशिप का आधा पैसा उनके परिवार की मदद के लिए दे रहे हैं ।
AMU के एक प्रोग्राम मे शहला राशिद को बुलाया गया था मगर उस से पहले उसके द्वारा नबी SAW ख़िलाफ़ आपत्तिजनक बयान दिया गया जिसकी वजह से उसे ए॰एम॰यू॰ मे आने से रोक दिया गया और फ़ैज़ुल हसन भाई ने उस गुस्ताखी के लिए उस पर FIR करवाई।
मैंने जितना भी ब्यान किया ये सब वो बातें हैं जिसे मैंने ए॰एम॰यू॰ में रहते हुए देखा है।मैंने हमेशा हर जाएज और हक़ की लड़ाई में सब से आगे पाया है जिसका नतीजा ये हुआ कि अब तक उनपर 73 मुक़दमे हैं
मगर इन सब के बावजूद न कभी ये डरे और ना ही  इनके क़दम पीछे हटे हाँ मगर इन्हें हौसला ज़रूर मिलता रहा ।हाल ही मे इन्हो ने शिवपाल यादव की पार्टी ज्वाइन की जिसमें उन्होंने  हर मामले को उठाया और हमेशा हक़ की बात की ।
आज कल फ़ैज़ुल हसन भाई बेगुसराय के क़द्दावर और मुस्लिमों के हमदर्द सांसद पद के उम्मीदवार डा० तनवीर हसन के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं और दिन रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं इंशाल्लाह कामयाब हो कर वापस आएँगे।
कुछ लोग अपने राजनीतिक फ़ायदे और अपनी Ideology के लिए उनकी मुख़ालिफ़त कर रहे हैं इस लिए मैंने सोचा कि उनके ये सारे काम जो उन्होने पिछले कुछ सालों मे किए उन्हें सामने लाना ज़रूरी है।इसपे भी मुख़ालफ़ीन बोलेंगे कि पैसे दिए गये हैं। बाक़ी आप समझदार हैं।

वासिफ नेहाल अंसारी (अलीग)
ए॰एम॰यू॰ अलीगढ़

शनिवार, 13 अप्रैल 2019

किसानों और युवाओं की पहली पसंद हेमराज वर्मा - अकरम क़ादरी

किसानों और युवाओं की पहली पसंद  हेमराज वर्मा- अकरम हुसैन

देश मे हो रहे चुनाव में इस बार सबसे अहम भूमिका निभाने वाला अगर कोई है तो वो आत्महत्याएं कर रहे  किसान और उनके वारिस बेटे-बेटियां है जिन्होंने इस देश के लिए हमेशा अहम योगदान दिया है फिर भी सरकारों और पूर्ववर्ती सरकारों ने इन्हें खूब ठगा है इसके बावजूद इन्होंने इसको नियति मानकर बर्दाश्त किया और हमेशा यही कहकर खुद को तसल्ली दी कि हमतो धूव घास है जितना काटोगे उतना ही उग जाएंगे, लेकिन इस बार किसानों ने जागरूक होकर वर्तमान सरकार का विरोध कर दिया क्योंकि पहले सरकारों में जितनी किसान आत्महत्याएं करते थे उनकी गिनती में उत्तरोत्तर बृद्धि हो रही है बल्कि यूं कहें दो गुना नही बल्कि 4 गुना बढ़ोत्तरी हो रही है फिर किसानों ने ही समझ लिया कि खेत मे हम मर रहे है और हमारे बेटे देश की सीमा पर इसलिए किसानों ने देश की वर्तमान सरकार से बदला लेने का मन बना लिया, फिर उनको सबक सिखाने के लिए खुद मैदान में आ गए।
पिछले दिनों हद तो तब हो गयी जब किसान अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे थे तो उनके बेटों के ही द्वारा उनपर लाठीचार्ज कराई जो सच मे बहुत ही भयावह घटना हुई जिससे किसान बहुत हद तक टूट गया ।
जिला पीलीभीत लोकसभा में इन सब परेशानियों को देखते हुए मौजूदा सांसद उम्मीदवार हेमराज वर्मा ने मां शारदा के बच्चों (किसानों) को न्याय दिलाने के लिए उनके कंधों से कंधा मिलाकर उनको न्याय दिलाने के लिए साथ निकल आये।
एक बार तो ऐसा हुआ जब पीलीभीत की वर्तमान सांसद दौरे पर आई तो उन्होंने किसानों से दो टूक कहा कि मैं आपको मना करती हूं तो क्यों गन्ना लगाते हो यह वीडियो इनकी खूब वायरल भी हुई जिससे किसानो औऱ नोजवानों में भारी गुस्सा है और इस समय उनका साथ देने वाला अगर कोई नेता था तो वो धरती पुत्र के पार्टी के नेता हेमराज वर्मा ने उनका साथ निभाया क्योंकि हेमराज वर्मा भी एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते है और वो किसानों की दयनीय स्थिति को अच्छे से समझते भी है पिछले दिनों एक उनकी खेत मे चलाते हुए वीडियो भी खूब वायरल हुई थी, इस बार गठबंधन ने उनको अपना प्रत्याशी भी बनाया है इसलिए किसानों, मजदूरों और युवाओं ने उनमें भरोसा जताया है जिस गांव मोहल्ले में वो सभा कर रहे है उनको अपार समर्थन मिल रहा है.....
जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान

अकरम क़ादरी
पॉलिटिकल एनालिस्ट

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

दशकों से काबिज, पीलीभीत के लिए विकास-मॉडल तैयार करने में बीजेपी असफल- मोहम्मद जावेद

दशकों से काबिज बीजेपी, पीलीभीत के लिए विकास-मॉडल तैयार करने में असफल रही है- मोहम्मद जावेद



पूरे देश में चुनावी मेला सज चुका है| हर प्रदेश अपने अपने चुनावी मुद्दों के साथ चुनावी मैदान है| हर प्रदेश के अपने चुनावी मुद्दे है अपने अपने नेता है| इन्ही प्रदेशों में एक प्रदेश है जिसका नाम उत्तर प्रदेश है, जहां की राजनीति देश की राजनीति में अहम् भूमिका निभाती है| कहा ये जाता है की दिल्ली की कुर्सी उत्तर प्रदेश से होकर जाती है| इसी प्रदेश में एक क्षेत्र है पीलीभीत जिसे बांसुरी नगरी भी कहा जाता है| 

देश की लगभग 95% बांसुरी बनाने वाली, बांसुरी नगरी पीलीभीत, उत्तर प्रदेश के रोहिलखंड क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित है| जिसकी साक्षरता दर 64% है| पीलीभीत क्षेत्र की आबादी 20 लाख से अधिक है जिसमे हिन्दू आबादी 71%, और मुस्लिम 24% हैं, पुरुष लगभग 10 लाख 72 हज़ार और 9 लाख 60 हज़ार महिलाएं हैं| 

पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र में कुल16 लाख 71 हज़ार 151 हैं जिन्हे आने वाली 23 को अपने मत का प्रयोग करना है| पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत 5 निर्वाचन क्षेत्र: बहेड़ी, बरखेडा, पूरनपुर, बीसलपुर और पीलीभीत आते हैं|   

पीलीभीत में पहले आम चुनाव 1952 में हुए जिसमे कांग्रेस पार्टी के मुकुंद लाल अग्रवाल ने जीत दर्ज की| उसके बाद 1980 और 84 के दशक में पीलीभीत सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा| 1989 और 1996 में मेनका गांधी ने जनता दल के टिकट पर चुनाव जीतकर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की| मेनका गाँधी ने पहली बार 2004 में बीजेपी के टिकट पर बड़े मार्जिन से चुनाव जीता| उसके बाद 2009 में उन्होंने अपनी ये सीट अपने बेटे वरुण गाँधी को दे दी जिन्होंने गौरक्षा पर दिए गए बिबादित बयानों के चलते इस सीट को जीता| 2014 मेनका गाँधी ने एक बार फिर बीजेपी से जीत हासिल की|

2014 में बीजेपी की मेनका गांधी ने 5 लाख 54 हज़ार वोट पाकर जीत को अपने नाम किया, सपा प्रत्याशी वुद्धसेन वर्मा 2 लाख 72 हज़ार 882 वोटों के साथ दुसरे नंबर पर रहे|

इस बार फिर बीजेपी के वरुण गाँधी और गठबंधन प्रत्याशी हेमराज चुनावी मैदान में आमने सामने हैं| इन दोनों के बीच काटें की टक्कर मानी जा रही है|  हालांकि अभी कांग्रेस ने अपने कैंडिडेट का एलान नहीं किया है| जहां एक तरफ वरुण गांधी का उनकी माँ द्वारा बनाया गया वोट बैंक है तो वहीं दूसरी तरफ हेमराज वर्मा एक स्थानीय प्रत्याशी है जो कि 2012 में असेंबली इलेक्शन जीत चुके हैं उन्होंने बीजेपी के प्रवक्तानन्द को भारी बहुमत से हराया था|

दूसरी तरफ 2009 में पीलीभीत से सांसद रह चुके हैं वरुण गांधी हैं जिन्होंने पीलीभीत से ही पहला चुनाव लड़ते हुए 4 लाख 19 हजार 539 वोटों से जीत हासिल की थी| उनके करीबी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के प्रत्याशी वीएम सिंह थे, जो उनकी मां मेनका गांधी के चेचेरे भाई हैं| 29 साल के वरुण एक रैली में संबोधित 'विवादास्पद बयान' देकर सुर्खियों में आए थे| इस बयान के बाद लगा कि भारतीय जनता पार्टी को वरुण गांधी के रूप में युवा चेहरा मिल गया| लेकिन पिछले कुछ दिनों तक वरुण अपनी ही पार्टी में हाशिए पर थे|

जहां एक तरफ बीजेपी नेता वरुण गांधी पर पीलीभीत में भड़काऊ भाषण देने, सांप्रदायिक सौहार्द को ठेस पहुँचाने, दंगा जैसे हालात पैदा कराना जैसे संगहीन मामले उनके विरुद्ध दर्ज हैं| वहीं हेमराज वर्मा पर भी एक मामला पब्लिक सर्वेंट को अपने कर्तव्य का पालन न करने देने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का मामला दर्ज हैं|

संपत्ति के मामले में हेमराज वर्मा के पास 55,000 कॅश के साथ साथ एक ट्रेक्टर और एक बाइक भी है| जिनकी सालाना कमाई लगभग 4 लाख है इसके साथ साथ 90 लाख के एसेट्स हैं| इससे पहले 2017 में वे लगभग 7 लाख का इनकम टैक्स रिटर्न भर चुके हैं| वही राहुल गांधी से भी चार गुना अमीर हैं वरुण गांधी| 2014 में दायर किए चुनाव एफिडेविट के मुताबिक वरुण गांधी की संपत्ति 35 करोड़ से भी अधिक है| करोड़पति होने के बावजूद राहुल और वरुण गांधी ने अपनी कार नहीं खरीदी है जो कि बेहद ताज्जुब की बात है|

पीलीभीत में गरीबी और बेरोजगारी अहम् चुनावी मुद्दे माने जा रहे हैं| अगर इलाके की गरीबी की बात करें तो पीलीभीत की लगभग आधी आबादी गरीबी रेखा से नीचे अपनी ज़िंदगी गुज़र बसर कर रही है| इसके अलावा इलाके का लगभग 45% युवा बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहा है| पिछले 6 दशकों में कोई ऐसा विकास का मॉडल तैयार नहीं गया जिससे युवा रोजगार हो सके|

मेनका गांधी के 6 बार संसद रहने के वाबजूद भी पीलीभीत की जनता को इसका कोई ख़ास फायदा नहीं हुआ है| जनता आज भी गरीबी और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है| मेनका गाँधी लम्बे समय से यहाँ की सांसद हैं लेकिन फिर भी यहां कोई ख़ास विकास होता हुआ नज़र नहीं आता है|

शनिवार, 30 मार्च 2019

पीलीभीत की पुकार हेमराज वर्मा क्यों- अकरम क़ादरी

पीलीभीत की पुकार हेमराज वर्मा क्यों - अकरम क़ादरी

2019 लोकसभा की जबसे सुगबुगाहट शुरू हुई है तबसे पीलीभीत की जनता में हेमराज वर्मा का विश्लेषण शुरू हो चुका है क्योंकि ज़िले के अंदर यही एक ऐसा कद्दावर नेता है जो विधायक का चुनाव बसपा से हारने के बाद फिर सपा से चुनाव जीतने के बाद, दोबारा चुनाव हारने के बाद भी कभी भी दुबककर नही बैठा जबकि अमूमन पीलीभीत में होता यह है कि चुनाव के छः महीने के आसापास ही नेता कलफ वाला कुर्ता पहनकर जनता के बीच मे मडराने लगते है लेकिन यह एक ऐसा नेता है जो विधानसभा हारने के बाद भी जनता के द्वार पर जाता रहा, उनके दुःख-सुख में बराबर का भागी भी रहा चाहे वो मज़दूरों, किसानों को नरभक्षी शेर के मारने की घटनाएं हो या फिर किसी कृषक के बीमारी की छोटी सी घटना हो उस पर पहुंचकर हर पल साथ देने का कमिटमेंट पीलीभीत की जनता को रास आ रहा है जब हेमराज वर्मा किसी कारणवश ज़िले में मौजूद नही होते है तो उनके भाई ब्लॉक प्रमुख अरुण वर्मा मोर्चा संभालते है और गरीब मजदूर जनता के काम को तल्लीनता से अंज़ाम देते है।
आखिरकार पीलीभीत की जनता के सामने यह बड़ा प्रश्न है इतना सबकुछ करने के बाद भी हम हेमराज वर्मा को क्यों पीलीभीत का सांसद चुने आखिर ऐसी क्या वजह है जिन लोगो ने इस सेवक को कार्य करते देखा होगा वो तो परिचित ही है फिर भी उनके ज्ञानवर्धन के लिए कुछ मुख्य कार्य बता देता हूँ कि उन्होंने अपनी विधायकनिधि के माध्यम से मझोला से डुनिडाम रोड, मझोला से भिखारीपुर रोड, गुप्ता कालोनी से नहर और बीसलपुर, बरखेड़ा तक का रोड, पीलीभीत गोहानियाँ चौराहे से माला कालोनी तक का रोड, बरखेड़ा में जीटीआई कॉलेज का निर्माण, 50 बेड का हॉस्पिटल तथा पीलीभीत से मझोला तक रोड का चौड़ीकरण का काम कराया, उसके अलावा बहुत ऐसे छोटे-छोटे काम है जिनको बताना शायद सम्भव नही है लेकिन जनता जानती है
हेमराज वर्मा ज़िला पीलीभीत का एक ऐसा व्यक्तित्त्व है जो युवाओं का चहेता तो है ही उसने कभी हिन्दू-मुस्लिम में भेदभाव नही किया कभी ऐसे भाषण नही दिए जिससे सामाजिक तानाबाना टूटे और नफरत की राजनीति करके वो आगे बढ़ जाये,
पीलीभीत की जनता को अब सोचना यह है कि जो लोग बाहर से आकर यहां चुनाव लड़ते है फिर अपने घर चले जाते है उनको चुनना है या फिर एक सामाजिक कार्यकर्ता, युवा जोश और किसानों के सच्चे मसीहा को चुनना है जो आपके बीच चौबीस घण्टे, सात दिन मौजूद है....लोकतंत्र में जनता हमेशा राजा होती है और उसके बनाये प्रतिनिधि उनकी भावनाओं को समझते है जबकि गन्ना किसानों की घटनाएं पूरे देश मे वायरल हुई थी जो बहुत ही पीड़ाजनक भी था, पिछले वर्ष जो कुपोषित बच्चो की रिपोर्ट आई थी उसमे पीलीभीत पहले स्थान पर था यह सबसे ज्यादा शर्मनाक बात थी, क्योंकि वो जिला जिसकी प्राकृतिक सम्पदा इतनी विशाल है जिसमे उत्तर-प्रदेश का सबसे अच्छा आयुर्वेदिक कॉलेज है वहां के बच्चे कुपोषित हो रहे है यह सब सोचने समझने के मुद्दे है ...जनता को झूठे, खोखले, वादों से बचकर, असली विकास, रोज़गार, किसानों की खुशहाली के लिए वोट करना होगा

जय हिंद
अकरम हुसैन
पॉलिटिकल एनालिस्ट

रविवार, 3 फ़रवरी 2019

किसानों की बेइज़्ज़ती कर रही है बीजेपी- सय्यद मसूद उल हसन

मैं भी एक किसान हूँ और मेरे कुछ सवाल हैं जुम्लेन्द्र सरकार द्वारा लाए गए हाल के बजट पर और किसानों को जो रोज़ की 16 रुपए 43 पैसे की भीख देने की योजना है उस पर:-
जो डीज़ल हमें 2014 तक 50 रुपए प्रति लीटर मिल जाता था 2014 के बाद 70 रूपये प्रति लीटर खरीद चुके हैं, जबकि कच्चे तेल की एक बैरल 50 डालर से भी कम हो गई थी।
जो यूरिया 150 रुपए मे 50 किलो मिलता था 2014 तक वो आज ही 340 रुपए का 45 किलो मिल पाया है, गेहूं की बुवाई मे लगने वाला डी0ए0पी 850 से 950 तक मिलता था 50 किलो 2014 तक, इस साल 1345 रुपए का 45 किलो  ही मिला है, ये तो हुई केन्द्र सरकार की किसानों पर मार अब आते हैं उत्तर प्रदेश पर ब्लॉक से गेहूं का बीज खरिदा 1 कुंटल  40 किलो दाम था 40 किलो के एक बैग का 1040 रुपए, ब्लाॅक वालो ने कहा सबसिडी मिलेगी 15 दिन में 60% मिली 2 महीने में 50% बीज की गुणवत्ता थर्ड क्लास सो अलग, अखिलेश यादव जी की पिछली सरकार ने आब पाशी फ्री कर दी थी ढोंगी बाबा ने फ़िर से पैसे वसूलने शुरू कर दिये हैं। गन्ने का पैसा जो हम किसानों को अखिलेश सरकार में एक से दो महीने में मिल जाता था अब उस पैसे को साल-साल भर गन्ना मिलें अपने बैंक खाते में जमा रख कर जो ब्याज कमा रही उस्से ढ़ोंगी बाबा के आॅफिस की चाय बन रही है? एक वादा किसानों से यह किया गया है बजट में की मोदी सरकार किसानों को 6000 रुपए सालाना भत्ता देगी तो सरकार ये जो 6000 हैं साल के वो दिन के 16 रुपए 43 पैसे तो इस्से ज़यादा की बिड़ी किसान भाई रोज़ पी जाते हैं तो यह भीख देने का क्या औचित्य है आप इस भीख को अपने पार्टी फंड में जमा कर लो और 16 रुपए रोज़ तो हम किसान आपको भी दे सकते हैं इतनी हैसियत तो हिन्दुस्तान के किसान रखते हैं, ये 16 रुपए 43 पैसे की भीख दे कर बग़ले बजाना बेहद दुखद है। इन सवालों का कोई जवाब हो तो बताना। जुम्लेन्द्र जी और ढ़ोंगी बाबा जी।
सय्यद मसूद उल हसन,
पूर्व उपाध्यक्ष,
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ।

शनिवार, 26 जनवरी 2019

तिरंगे की बेइज़्ज़ती करने वाले तिरंगा यात्रा का ढोंग ना करे- अकरम क़ादरी

एक वो है जो झण्डा बनाता है...
दूसरा वो है जो झण्डा फहराता है....
तीसरा वो है जो झण्डे से तिरंगा यात्रा के नाम पर खेलता है.....
उसको ही पहचानना ज़रूरी है....
फिर वो दाबे करता है कि वो देशभक्त है जबकि वो देशभक्त नही  बल्कि दंगाई है, दिमाग़ी गंदगी भरे हुए है जिसका उदाहरण हमें कठुआ में एक बलात्कारी के लिए निकाली तिरंगा यात्रा, और कासगंज में तिरंगा यात्रा के नाम पर मुस्लिम बस्तियों में जाकर गाली गलौज, उसके बाद एक युवक की मौत.....तो भाइयो, बहनों और मोदी जी के फ़र्ज़ी मित्रों तिरंगा यात्रा निकालने से पहले उसका इतिहास भी समझो क्योंकि कभी भी तुम्हारे बाप-दादा ने तिरंगे के बारे में तो जाना नही बल्कि उसको कई बार जलाया है पिछले दिनों मुरादाबाद के एक बीजेपी पार्षद ने तिरंगे को पैरो से कुचला था जिसकी फोटोज बहुत वायरल हुई थी, दूसरी बात तुम जिस तिरंगे की बात कर रहे हो उसका सम्मान करना ही है तो नागपुर और झंडेवालान के कार्यालय पर लहरा के देखो तो हमें भी यकीन होगा तुम देशभक्त हो वरना दोगले तो 1857 से ही हो, दूसरा कारण यह भी है संघ के जो बड़े-बड़े तथाकथित प्रचारक हुए है उन्होंने कभी भारतीय झण्डे को अपना ध्वज माना ही नही है.....फ़र्ज़ी राजनीति करने से अच्छा है थोड़ा पढ़ भी लेते.......जो कुछ तुम बोल पाते और लिख पाते......जो चैनल यह फ़र्ज़ी डिबेट चला रहे है उनमें छी न्यूज़ के सुभाष चंद्रा जी निवेशकों से पत्र लिखकर माफी मांग चुके है दूसरे चैनलों का भी नम्बर आने वाला....देश की जनता 2019 में जी रही है वो तुम्हारे 5 साल का रिपोर्ट कार्ड भी हाथ मे रखे बैठी है और तुम्हारी फ़र्ज़ी तिरंगा यात्रा भी समझती है और तुम्हारे दिमागो में भरे गुबार भी जल्दी ही वो इसका जवाब दे देगी बस तुम EVM सही रखना.....
जय हिंद

#समी_क़ादरी

सोमवार, 21 जनवरी 2019

यूनिट्री फाउंडेशन के सोहैल यूनिटी कर रहे है एएमयू का नाम रौशन- अकरम क़ादरी

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का एक ऐसा साबिक तालिब-ए-इल्म जो यारो का यार है जिसके अंदर सियासत के साथ-साथ कौम और मिल्लत की मदद करने का जज़्बा कभी कम नही हुआ जिसका सही नाम तो सोहैल अबरार है लेकिन लोगो को जोड़कर, मोहब्बत, हंसी-खुशी और प्यार से एक रखने की वजह से लोग उसको सोहैल यूनिटी के नाम से ज्यादा जानते है जिससे मेरी भी कई नाइत्तेफाकिया रही, लेकिन उसने कभी दोस्ती यारी से मुँह नही मोड़ा हमेशा मजबूती से साथ खड़ा रहा, एएमयू से सेक्रेटरी का चुनाव लड़ना चाहा लेकिन कुछ मजबूरियों की वजह से उसका यह सपना पूरा नही हुआ, लेकिन उसको तो इदारे की मोहब्बत और अलीगढ़ की फ़िक़्र कौम और मिल्लत की फ़लाह के लिए काम करना था तो उसने बगैर किसी ओहदे के अपने ही शहर में ग़रीबों और मज़लूमो की मदद करना शुरू कर दिया, जब उसको ख़्याल आया यह काम वो ओर भी अच्छे से कर सकता है तो कुछ दोस्तों के साथ मिलकर उसने #यूनिट्री_फाउंडेशन के नाम से एक NGO बनाई जिसमे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के साबिक तालिब-ए-इल्म और कुछ मौजूदा एएमयू दोस्तो, हमदर्दों को लेकर गांव देहात में घूम-घूम कर गरीब बच्चों के एएमयू में फॉर्म अप्लाई कराये जिससे ज़्यादा से ज़्यादा गरीब लोगो के बच्चे अलीगढ़, जामिया और दूसरी यूनिवर्सिटीज में पहुंच सके, कुछ सालो से वो समाजवादी पार्टी के झण्डे के नीचे रहकर भी सियासी काम कर रहा है जिससे कौम को उसका फ़ायदा भी नज़र आ रहा है....सोहैल यूनिटी हमेशा किसी भी फालतू काम मे ना पढ़कर बल्कि ऐसा काम करता है जिससे सबका फायदा हो और किसी का भी नुकसान ना हो .....मुझे फ़क्र है कि मैं एक ऐसे हमदर्द, हँसमुख का दोस्त हूँ....... एएमयू के तलबा को आप पर फ़क्र है जो आप बगैर किसी ओहदे के एएमयू में गरीब बच्चों को भेज रहे हो और ज़रूरत पड़ने पर उनकी फीस भी दे रहे हो
#शुक्रिया_यूनिटी

अकरम क़ादरी