गुजरात तो हरेन पांड्या हत्याकांड से भारत मे बहुत मशहूर था लेकिन 2002 के दंगों ने गुजरात को देश विदेश में एक अलग ही पहचान दी जिसको माननीय कविवर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक सार्वजनिक मंच पर राज धर्म निभाने का बोल भी चुके तो और उस वक़्त के तत्कालीन मुख्यमंत्री को सबके सामने डाँट भी चुके थे । 2001 से ही गुजरात की राजनीति में जो उछल पुच्छल मच चुकी थी उसमे शुरुआत हत्या से हुई और कुर्सी तक पहुंचते पहुंचते नरसंहार कराने पढ़ें उसमे ना जाने कितनी महिलाओ को विधवा बनाया गया, हजारों महिलाओं के साथ बलात्कार किये गये, बच्चों को माँ का पेट फाड़कर मारा गया एेसे कुकृत्यों से देश शर्मसार हुआ। देश का विकास भी बाधित हुआ वो अलग। आज भी जिसकी लपटें हमें देखने को मिल जाती हैं
पिछले दिनों कांग्रेस उपाध्यक्ष जिनको अब बोलना शायद आ चुका है वो भी अब खूब बढ़कर बोलने लगे है जो आक्रमकता की राजनीति को शायद अब समझ रहे है जोकि उनके पाले में जा रहे है अब मेनस्ट्रीम मीडिया का भी उनको साथ मिलना कुछ हद तक शुरू हो चुका है।
गुजरात में बीजेपी को गड्ढे में धकेलने में सबसे अहम किरदार पाटीदार समाज के कर्ता-धर्ता हार्दिक पटेल अदा करेंगे जिनको शिवसेना का तो समर्थन है ही उसके अलावा वो 'आप' में भी कुछ ज़मीनी स्तर पर काम कर चुके है और कांग्रेस तो पूरी तरह से पाटीदार समाज के प्रमुख के साथ खेल रही है
गुजरात मे बीजेपी को हराने में कपड़ा व्यापारी अहम रोल अदा कर सकते है क्योंकि नोटबन्दी के बाद GST के बिल ने उनकी कमर तोड़ दी है जिसको वो मोदी सरकार को उनके डायरेक्ट पेट मे लात मारने जैसा समझ रहे है और उन्होंने GST के खिलाफ शुरू से ही सूरत में लाखों की तादाद में विरोध किया। सूरत के साथ ही अहमदाबाद और जामनगर में भी कपड़ा व्यापारियों ने बड़ी बड़ी रैलियाँ निकाली थी। लेकिन मुख्य मीडिया में वो सुर्खियां नही बटोर पायीं। जिससे उनके अंदर बहुत गुस्सा है जिसको वो इस चुनाव में भाजपा को विधानसभा चुनाव हराकर पूरा करने की कोशिश करेंगे। जबकि बीजेपी को सबसे ज्यादा समर्थन आजतक गुजरात के पाटीदारों और व्यापारियों से ही मिला है जो अब खिसकता हुआ नजर आ रहा है ऐसा प्रतीत भी हो रहा है कि आने वाले समय मे गुजरात की शक्ल बदल सकती है कोई दूसरा गुजरात मे काबिज़ हो जाएगा
इसके साथ ही ऊना कांड ने बीजेपी की पूरे देश में किरकिरी करवादी थी और आज भी गुजरात के दलित परेशान हैं। आज भी दलितों के साथ छुट पुट घटनाएँ होती रहती हैं। इसका असर सीधा गुजरात विधान सभा में देखने को मिलेगा। वहीं बीजेपी भी इन सब चीजों से अवगत है वह अपने तुरुप के पत्ते रखे हुए है जिनमें कांग्रेस की गृहकलह को हवा देना, पाटीदार अंदोलन को कमजोर करना, जीएसटी में कटौती करके कपड़ा व्यापारियों को मनाना आदि। अब देखना यह है कि कौन मौकों को भुनाकर बाजी मारता है।